Garmin Jeevan In Hindi Essay On Mother

माँ से बेहतर किसी को भी नहीं माना जा सकता है, उसके प्यार और देख-रेख को। चलिये आपके बच्चों को उनके स्कूल में माँ के बारे में कुछ लिखने या व्याख्यान करने को देते है। आपके स्कूल जाने वाले बच्चों के लिये ये निबंध और भाषण बहुत आसान शब्दों में लिखा गया है।

"खुदा का दूसरा रूप है माँ
ममता की गहरी झील है माँ
वो घर किसी जन्नत से कम नहीं
जिस घर मे खुदा की तरह पूजी जाती है माँ"

माँ पर निबंध (मदर एस्से)

Find below some essays on Mother in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

माँ पर निबंध 1 (100 शब्द)

हर एक के जीवन में माँ एक अनमोल इंसान के रुप में होती है जिसके बारे शब्दों से बयाँ नहीं किया जा सकता है।ऐसा कहा जाता है कि भगवान हर किसी के साथ नहीं रह सकता इसलिए उसने माँ को बनाया हालाँकि माँ के साथ कुछ महत्वपूर्ण क्षणोँ को वर्णित किया जा सकता है। एक माँ हमारे जीवन की हर छोटी बड़ी जरुरतो का ध्यान रखने वाली और खूबसूरत इंसान होती है। वो बिना किसी अपने व्यक्तिगत लाभ के हमारी हर जरुरत के लिये हर पल ध्यान रखती है।

सुबह के समय वो बहुत प्यार से हमें बिस्तर से उठाती है और रात के समय वो प्यारे सपनों के साथ कहानियाँ सुना कर सुलाती है। हमारी माँ हमें स्कूल जाने के लिये तैयार होने में मदद करती है और हमारे लिये सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना भी बना कर देती है। वो दोपहर में दरवाजे पर खड़ी होकर के हमारे स्कूल से लौटने का इंतजार करती है साथ ही वो हमारे स्कूल होमवर्क में भी मदद करती है।

माँ पर निबंध 2 (150 शब्द)

हमारे जीवन में माँ की भूमिका हमेशा अलग होती है और जीवन में शामिल दूसरे लोगों से अनमोल होती है। अवश्य ही माँ का पूरा दिन हमारी जरुरतो को पूरा करने बीत जाता है वो अपने बच्चों से कुछ भी वापस नहीं पाना चाहती है बल्कि वो उनको खुले दिल से प्यार करती है। बच्चे होने के नाते हम भी माँ से प्यार करते है और दिल से उसका ध्यान करते है। लेकिन उसके प्यार से हमारे प्यार की तुलना नहीं की जा सकती। साथ रहने वाले भगवान के रुप में सभी के जीवन में इस दुनिया में माँ सबसे अलग होती है जो अपने बच्चों के सभी दुख ले लेती है और उन्हें प्यार और संरक्षण देती है।

माँ ही वो इंसान है जो अपने बच्चों के बुरे दिनों और बीमारीयों में उनके लिये रात-रात भर जागती है। वो उनकी हर खुशी में शामिल होती है और उनके हर पसंद-नापसंद को समझती है। वो हमेशा अपने बच्चों को सही राह पर आगे बढ़ने के लिये मार्गदर्शन करती है और जीवन में सही कार्य करने को प्रेरित करती है। वो हमारी पहली अध्यापक होती है जो जीवन के हर कदम पर हमें नयी नयी सीख देती है और हमें सही गलत का अंतर बताती है वो हमेशा हमें अनुशासन का पालन करना, अच्छा व्यवहार करना और देश, समाज, परिवार के लिये हमारी जिम्मेदारी और भूमिका को समझाती है।

माँ पर निबंध 3 (200 शब्द)

हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण इंसान हमारी माँ होती है जो एक वास्तविक प्रकृति की तरह हमेशा हमारी परवरिश करती है। वो हमेशा हमारे साथ रहती है और हर पल हमारा ध्यान रखती है। ढ़ेर सारे दुख और पीड़ा सहकर वो हमें अपनी कोख में रखती है जबकि उसके वास्तविक जीवन में वो हमेशा हमारे बारे मे सोचकर खुश हो जाती है। बिना किसी शिकायत के वो हमें जन्म देती है। पूरे जीवन भर हम उसके खरे प्यार और परवरिश की तुलना किसी और से नहीं कर सकते इसलिये हमें हमेशा उसको प्यार और सम्मान देना चाहिये। हर वो इंसान जिसके पास माँ है वो दुनिया का सबसे खुशनसीब व्यक्ति है और उसे भगवान से ढ़ेर सारा आशीर्वाद मिला हुआ है।

एक माँ बेहद सामान्य महिला होती है जो अपने बच्चों की खुशी के आगे अपनी खुशी को कुछ नहीं समझती। वो हमेशा हमारी हर क्रिया और हँसी में अपनी रुचि दिखाती है। उसके पास एक स्वार्थहीन आत्मा है और प्यार तथा जिम्मेदारी से भरा दयालु दिल है। आत्मशक्ति से भरी वो एक ऐसी महिला है जो हमें जीवन के सबसे कठिन चुनौती का सामना करना सीखाती है। जीवन की सभी कठिनाईयों से उभारती है. वो हमें हमेशा हमारे जीवन में अच्छे चीजों को पाने के लिये प्रेरित करती है। वो सभी के जीवन की पहली अध्यापक होती है जिसकी शिक्षा पूरे जीवन भर कीमती और लाभप्रद साबित होती है।


 

माँ पर निबंध 4 (250 शब्द)

किसी के भी जीवन में एक माँ पहली, सर्वश्रेष्ठ और सबसे अच्छी व महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि कोई भी उसके जैसा सच्चा और वास्तविक नहीं हो सकता। वो एकमात्र ऐसी है जो हमेशा हमारे अच्छे और बुरे समय में साथ रहती है। अपने जीवन में दूसरों से ज्यादा वो हमेशा हमारा ध्यान रखती है और प्यार करती है जितना कि हम काबिल नहीं होते है। अपने जीवन मे वो हमें पहली प्राथमिकता देती है और हमारे बुरे समय में उम्मीद की झलक देती है। जिस दिन हम पैदा होते है वो माँ ही होती है जो सच में बहुत खुश हो जाती है। वो हमारे हर सुख-दुख का कारण जानती है और कोशिश करती है कि हम हमेशा खुश रहें।

माँ और बच्चों के बीच में यहाँ एक खास बंधन होता है जो कभी खत्म नहीं हो सकता है। कोई माँ कभी भी अपने प्यार और परवरिश को अपने बच्चे के लिये कम नहीं करती और हमेशा अपने हर बच्चे को बराबर प्यार करती है लेकिन उनके बुढ़ापे में हम सभी बच्चे मिलकर भी उसे थोड़ा सा प्यार नहीं दे पाते है। इसके बावजूद वो हमें कभी गलत नहीं समझती और हमेशा एक छोटे बच्चे की तरह माफ कर देती है। वो हमारी हर बात को समझती और हम उसे बेवकूफ नहीं बना सकते है।

वो नहीं चाहती कि हमें किसी दूसरे से तकलीफ पहुँचे और दूसरों से अच्छा व्यवहार करने की सीख देती है। माँ को धन्यवाद देने और आदर के लिये हर साल 5 मई को मातृ दिवस के रुप में मनाया जाता है। हमारे जीवन में माँ के रुप में कोई भी नहीं हो सकता है। हम भी हमेशा पूरे जीवन भर अपने माँ का ख्याल रखते है।

माँ पर निबंध 5 (300 शब्द)

हर एक के जीवन में माँ ही एक ऐसी होती है जो हमारे दिल में किसी और की जगह नहीं ले सकती है। वो प्रकृति की तरह है जो हमेशा हमको देने के लिये जानी जाती है, बदले में बिना कुछ भी हमसे वापस लिये। हम उसे अपने जीवन के पहले पल से देखते है जब इस दुनिया में हम अपनी आँखे खोलते है। जब हम बोलना शुरु करते है तो हमारा पहला शब्द होता है माँ। इस धरती पर वो हमारी पहला प्यार, पहला शिक्षक और सबसे पहला दोस्त होती है । जब हम पैदा होते है तो हम कुछ नहीं जानते और कुछ भी करने के लायक नहीं होते हालाँकि ये माँ ही होती है जो हमें अपनी गोद में बड़ा करती है। वो हमें इस काबिल बनाती है कि हम दुनिया को समझ सकें और कुछ भी कर सकें।

वो हमेशा हमारे लिये उपलब्ध रहती है ईश्वर की तरह हमारी परवरिश करती है। अगर इस धरती पर कोई भगवान है तो, वो हमारी माँ है। कोई भी हमें माँ की तरह प्यार और परवरिश नहीं कर सकता और कोई भी उसकी तरह अपना सबकुछ हमारे लिये बलिदान नहीं कर सकता। वो हमारे जीवन की सबसे बेहतरीन महिला होती है जिसकी जगह किसी के भी द्वारा भविष्य में नही बदली जा सकती। बहुत थकने के बावजूद भी वो हमेशा हमारे लिये बिना थके हुये की तरह कुछ भी करने को तैयार रहती है। वो हमें बड़े प्यार से सुबह भोर में उठाती है, नाश्ता बनाती है और दोपहर का खाना और पीने का बोतल हमेशा की तरह देती है।

दोपहर में सभी काम-काज खत्म करने के बाद वो दरवाजे पर हमारा इंतजार करती है। हमारे लिये वो रात का जायकेदार खाना बनाती है और हमेशा हमारे पसंद-नापसंद का ध्यान रखती है। वो हमारे प्रोजेक्ट और स्कूल होमवर्क में भी मदद करती है। जिस तरह एक महासागर बिना पानी के नहीं हो सकता उसी तरह माँ भी हमें ढ़ेर सारा प्यार और देख-रेख करने से नहीं थकती है। वो अनोखी होती है और पूरे ब्रम्हाण्ड में एकमात्र ऐसी है जिसे किसी से नहीं बदला जा सकता। वो हमारे सभी छोटी और बड़ी समस्याओं का असली समाधान है। वो इकलौती ऐसी होती है जो कभी भी अपने बच्चों को बुरा नहीं कहती और हमेशा उनका पक्ष लेती है।


 

माँ पर निबंध 6 (400 शब्द)

इस दुनिया में किसी भी चीज को माँ के सच्चे प्यार और परवरिश से नहीं तौला जा सकता। वो हमारे जीवन की एकमात्र ऐसी महिला है जो बिनी किसी मंशा के अपने बच्चे को ढ़ेरा सारा प्यारा परवरिश देती है। एक माँ के लिये बच्चा ही सबकुछ होता है। जब हम मजबूर होते है तो वो हमेशा जीवन में किसी भी कठिन कार्य को करने के लिये हमें प्रेरित करती है। वो एक अच्छी श्रोता होती है और हमारे हर अच्छी और बुरी बातों को सुनती है जो हम कहते है। वो हमें कभी रोकती नहीं और किसी हद में नहीं बाँधती। वो हमें अच्छे-बुरे का फर्क करना सीखाती है।

सच्चे प्यार का दूसरा नाम माँ है जो केवल एक माँ हो सकती है। उस समय से जब हम उसकी कोख में आते है, जन्म लेते है और इस दुनिया मे आते है पूरे में जीवन भर उसके साथ रहते है। वो हमें प्यार और परवरिश देती है। माँ से अनमोल कुछ भी नहीं जो भगवान के द्वारा आशीर्वाद समान होता है इसलिये हमें ईश्वर का आभारी होना चाहिये। वो सच्चे प्यार, परवरिश और बलिदान का अवतार होती है। वो एक ऐसी होती है जो हमें जन्म देकर मकान को मीठे घर में बदल देती है।

वो एक ऐसी है जो पहली बार हमारे स्कूल की शुरुआत घर में ही करती है हमारे जीवन की सबसे पहली और प्यारी शिक्षक होती है। वो हमें जीवन का सच्चा दर्शन और व्यवहार करने का तरीका सीखाती है। इस दुनिया में हमारे जीवन के शुरु होते ही वो हमें प्यार करती है और हमारा ध्यान देती है अर्थात उसकी कोख में आने से उसके जीवन तक। बहुत दुख और पीड़ा सहकर वो हमें जन्म देती है लेकिन इसके बदले में वो हमेशा हमें प्यार देती है। इस दुनिया में कोई भी ऐसा प्यार नहीं है जो बहुत मजबूत, हमेशा के लिये निस्वार्थ हो, शुद्ध और समर्पित हो। वो आपके जीवन में अंधकार को दूर करके रोशनी भरती है।

हर रात को वो पौराणिक कथाएँ सुनाती है, देवी-देवताओं की कहानियाँ और दूसरी राजा-रानीयों की ऐतिहासिक कहानियाँ सुनाती है। वो हमेशा हमारे स्वास्थ्य, शिक्षा, भविष्य और अजनबियों से हमारी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित रहती है। वो हमेशा हमें जीवन में सही दिशा की ओर आगे बढ़ाती है और सबसे खास बात कि वो हमारे जीवन में खुशियाँ फैलाती है। वो हमें छोटे और असमर्थ बच्चे से मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और बौद्धिक मनुष्य बनाती है। वो हमेशा हमारा पक्ष लेती है और भगवान से हमारे स्वास्थ्य और अच्छे भविष्य के लिये पूरे जीवन भर प्रार्थना करती है इसके बावजूद कि हम कई बार उनको दुखी भी कर देते है। लेकिन हमेशा उसके मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक दर्द होता है जिसे हमें समझने की जरुरत है ध्यान रखने की जरुरत है।

 

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माँ, माँ ही जननी है, माँ ही भगवन है, माँ सब कुछ है. आई लव यू माँ, मेरी प्यारी माँ – ये आर्टिकल मेरी सभी माँ के लिए.

  • टॉपिक : Essay on Mother in Hindi
  • शीर्षक : माँ का महत्व
  • वर्ड : 700+

हेल्लो दोस्तों और प्यारे बच्चो, मेरी प्यारी माँ के इस प्यारे से आर्टिकल में आपका HimanshuGrewal.com पर में तहे दिल से स्वागत करता हूँ.

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इस आर्टिकल मै आज में आपके साथ Mother’s day hindi essay शेयर करने जा रहा हूँ, जिसको आप अपने स्कूल और कॉलेज में सभी छात्रों के सामने प्रस्तुत कर सको.

Mothers day essay के अलावा अगर आप माँ के ऊपर स्पीच (भाषण) बोलना चाहते हो तो आप heart touching speech on mother पर क्लिक करके इमोशनल स्पीच किसी पेपर पर उतार सकते हो और उसको अपने भाषण में इस्तेमाल कर सकते हो.

Essay on Mother in hindi को शुरू करने से पहले अगर आप अपनी माँ के लिए कविता डाउनलोड करना चाहते हो तो आप Maa par kavita पर क्लिक करके बेस्ट मदर्स डे कविता डाउनलोड कर सकते हो.

आईये दोस्तों अब हम अपनी Mothers day speech को शुरू करते है:-

नोट:- अगर आपको Mother essay पसंद आया तो इस आर्टिकल में अपना कमेंट जरुर करे और जितना हो सके माँ के इस आर्टिकल को सोशल मीडिया पर शेयर करे. 🙂

Essay on Mother in Hindi – माँ का महत्व निबंध

माँ के बिना जीवन संभव नही है| माँ जननी है, असहनीय शारीरिक कष्ट के उपरान्त वह शिशु को जन्म देती है.

व्यक्तिगत स्वार्थो को त्यागकर, अपने कष्टों को भूलकर वह शिशु का पालन-पोषण करती है.

अपनी संतान के सुख के लिए माँ अनेक कष्टों और प्रताड़नाओ को भी सहर्ष स्वीकार कर लेती हैं.

माँ के स्नेह एवं त्याग का पृथ्वी पर दूसरा उदाहरण मिलना सम्भव नहीं है| हमारे शास्त्रों में माँ को देवताओं के समान पूजनीय बताया गया है.

इस संसार में माँ की तुलना किसी अन्य से नहीं की जा सकती| परिवार में माँ का महत्व सबसे बड़ा है.

घर-परिवार को सम्भालने के साथ माँ अपनी सन्तान का पालन-पोषण भी करती है और उसका प्रत्येग दुःख-दर्द दूर करने के लिए दिन-रात सजग रहती है.

परिवार के अन्य सदस्य अपने-अपने निजी कार्यों में व्यक्त रहते हैं परन्तु माँ सन्तान के लिए समर्पित रहती है.

माँ का सर्वाधिक समय सन्तान की देखभाल में व्यतीत होता है| सन्तान की देखभाल के लिए माँ को रात में बार-बार जागना पड़ता है| परन्तु अधूरी नींद के उपरान्त भी माँ सदैव संतान के प्रति चिंतित रहती है.

सन्तान को संस्कार प्रदान करने में माँ का विशेष योगदान होता है| माँ ही संतान को चलना-बोलना सिखाती है.

आरम्भ में माँ ही संतान के अधिक सम्पर्क में रहती है, माँ के मार्ग-दर्शन में ही संतान का विकास होता है.

महान संत, महा पुरुषों की जीवनी सुनाकर माँ सन्तान में महान व्यक्ति बनने के संस्कार कूट-कूटकर भरती है| वह सन्तान को सामाजिक मर्यादाओं का ज्ञान कराती है और उच्च विचारों का महत्व बताती है.

सन्तान को चरित्रवान, गुणवान बनाने में सर्वाधिक योगदान माँ का होता है| एक और वह सन्तान को लाड़-प्यार से सुरक्षा एवं शक्ति प्रदान करती है, दूसरी और डांट-डपटकर उसे पतन के मार्ग पर जाने से बचाती है.

किसी भी व्यक्ति का चरित्र-निर्माण उसकी माँ की बुद्धिमत्ता पट निर्भर करता है| एक माँ ही किसी भी व्यक्ति की प्राथमिक शिक्षिका होती है.

प्रत्येक माँ को अपनी सन्तान सर्वाधिक प्रिय होती है| अपनी सन्तान के लिए माँ सारे संसार से लड़ सकती है, परन्तु संतान के प्रति माँ का अन्धा मोह प्राय: सन्तान के लिए अहितकर सिद्ध होता है.

सन्तान के पालन-पोषण में माँ को लाड़-प्यार के साथ बुद्धिमत्ता की भी आवश्यकता होती है.

अत्यधिक लाड़-प्यार में माँ की सन्तान के प्रति लापरवाही सन्तान को पथभ्रष्ट कर सकती है.

माँ का अत्यधिक मोह सन्तान को कामचोर और जिधि बना सकता है| वास्तव में योग्यता कठिन परिश्रम के उपरान्त ही प्राप्त होती है.

एक बुद्धिमान माँ अपनी सन्तान से प्रेम अवश्य करती है, परन्तु उसे योग्य बनाने के लिए उसके प्रति कठोर बनने में कोताही नहीं करती.

लाड़-प्यार के नाम पर सन्तान को अधिक ढील देने वाली माँ को बाद में पशचाताप ही करना पड़ता है.

आधुनिक समाज में माँ को दोहरा जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है.

नारी–स्वतंत्रता के नाम पर अधिकांश महिलाएँ विभिन्न श्रेत्रों में नोकरी, व्यवसाय कर रही हैं| उन्हें घर-परिवार की देखभाल के लिए अधिक समय नहीं मिलता परन्तु घर-परिवार की देखभाल नारी को ही करनी पड़ती है.

सुबह परिवार में सबसे पहले जागकर वह घर के काम-काज करती है| दिन में उसे नोकरी, व्यवसाय में खटना पड़ता है और शाम को घर आने पर पुन: परिवार का दायित्व उसके कंधों पर आ जाता है.

इस दोहरे जीवन में स्पष्टतया नारी अथवा माँ को कठिनाई अवश्य होती है, परन्तु वह प्रत्येक परिस्थिती से मुकाबला करते हुए अपनी शक्ति को प्रमाणित करती है.

वास्तव में माँ की आंतरिक शक्ति अतुलनीय है| यद्यपि हमारे पुरष-प्रधान समाज में पुरुषों को अधिक अधिकार प्राप्त हैं, परन्तु माँ के बिना परिवार की कल्पना नही की जा सकती.

दिन में घर से बाहर काम-काज में खटने के बाद भी घर-परिवार का दायित्व संभालने की सामर्थ्य माँ में ही सम्भव है.

एक पुरुष काम-धंधे के लिए कठोर परिश्रम कर सकता है, परन्तु घर-परिवार और विशेषतया बच्चों को सम्भालने की योग्यता पुरुष में नही होती.

हमारे शास्त्रों में सत्य ही कहा गया है कि माँ देवताओं के समान पूजनीय होती है. वास्तव में माँ परिवार में सर्वाधिक सम्मान की अधिकारी है. माँ का महत्व सबसे बड़ा है.

ये कहानी shareyouressays वेबसाइट से ली गयी है.

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